Wednesday, January 7, 2009

भोपाल को प्रदूषण मुक्त बनाने की कोशिश!

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने भोपाल को प्रदूषण मुक्त बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। राज्य सरकार ने अवैध बस संचालन, पॉलीथिन के इस्तेमाल और शहर के भीतर चल रही डेयरियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए समय निर्धारित कर एक कार्य योजना भी तैयार की है।भोपाल में मनमर्जी से चल रही अवैध बसों की मस्ती किसी से छुपी नहीं है। इसके अलावा पॉलीथिन का इस्तेमाल भी बदस्तूर जारी है और शहर के लगभग हर हिस्से में डेयरियों की भरमार है। इन स्थितियों से नगर निगम, पुलिस व परिवहन महकमा और प्रदूषण विभाग बखूबी वाकिफ है।
बिगड़ते हालातों के कारण स्थानीय नगरीय प्रशासन मंत्री बाबू लाल गौर ने जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे तय समय सीमा में इन समस्याओं से राजधानी को मुक्ति दिलाएं।गौर के मुताबिक अवैध रूप से चल रही बसों पर 24 घंटे में लगाम कस जानी चाहिए। इतना ही नहीं आवारा पशुओं की धरपकड़ का अभियान तेज कर उनके मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
ऐसा करने के लिए 15 दिन का समय तय किया गया है। इसी समय सीमा में शहर से डेयरियों को भी बाहर करना है। इसके अतिरिक्त पॉलीथिन के क्रय, विक्रय और इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए पहल के निर्देश जारी किए गए हैं।

प्रदूषण के लिए म.प्र. सरकार को नोटिस
24 सितम्बर 2008 वार्ता नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने किसानों की याचिका पर मध्यप्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। किसानों ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उज्जैन स्थित ग्रासिम इंडस्ट्रीज से बड़ी मात्रा में अत्यंत नुकसानदेह रसायन निकलता है, जिससे इलाके की 28 हेक्टयर कृषि योग्य भूमि नष्ट हो गई है।मुख्य न्यायाधीश केजी. बालकृष्णन, न्यायमूर्ति पी. सदाशिवम तथा न्यायमूर्ति जेएम. पांचाल की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील की दलील सुनने के बाद यह नोटिस सोमवार को जारी किया।वकील का कहना था कि इस कारखाने से बड़ी मात्रा में निकलने वाले रसायनों से इलाके की उपजाऊ जमीन बंजर होती जा रही है और पानी अम्लीय तथा पीने लायक नहीं रह गया है।याचिकाकर्ता मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील की है, जिसमें उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।किसानों ने इलाके के उपमंडलीय अधिकारी से 2005 में ही शिकायत की थी। उनका कहना है कि औद्योगिक प्रदूषण के चलते 28 हेक्टयर भूमि पर खड़ी फसल बर्बाद हो गई थी।

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