Wednesday, January 7, 2009

संक्रमण के शिकार!

जोधपुर । शहर के सरकारी अस्पतालों के ऑपरेशन थियेटर व ट्रोमा सेंटर में उपचार के समय चिकित्सक व वहां कार्यरत सहायक कर्मचारी खुद को संक्रमण से बचाने का पूरा जतन करते हैं। इसके उलट अस्पताल के गंदे एवं संक्रमित कपडे, गॉज व चादर की धुलाई करने वाले कार्मिकों के स्वास्थ्य की चिंता किसी को नहीं है। इसके चलते वे अनचाहे संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। मामला डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज से जुडे अस्पतालों के धोबीघाट पर कार्यरत कर्मचारियों का है, जो पेट पालने की मजबूरी में रोजाना इस संक्रमण को झेल रहे हैं। दिलचस्प पहलु यह है कि सौ फीसदी संक्रमण क्षेत्र में कार्यरत इन कर्मचारियों को कोई जोखिम भत्ता देय नहीं है। मरीजों के खून एवं पस से सने कपडे धोने के लिए उन्हें दस्ताने तक उपलब्ध नहीं कराए जाते। साबुन, तेजाब एवं सोडे की क्वालिटी बेहद घटिया है। बदला नहीं तरीकामेडिकल कॉलेज से जुडे तीनों अस्पतालों में प्रतिदिन हजारों की तादात में कपडे धुलते हैं। लेकिन बरसों बाद भी यहां परम्परागत तरीका काम में लिया जा रहा है। मशीनें नहीं मिलने से आज भी यहां भट्टी में कपडों को उबाल कर धोया जाता है। नहीं होती स्वास्थ्य जांच संक्रमण से प्रभावित कार्यस्थलों को "हाई रिस्क" जोन माना गया है। यहां कार्यरत कार्मिकों की नियमानुसार साल में एक बार उच्च स्तरीय मेडिकल जांच होनी अनिवार्य है, लेकिन अस्पतालों में स्वास्थ्य परीक्षण की ऎसी कोई व्यवस्था नहीं है।नाम का तेजाब, घटिया सोडाजानकार कहते हैं कि यूं तो धोबीघाट पर कपडे धोने के लिए सोडा पाउडर, साबुन व तेजाब उपलब्ध होता है। वास्तव में तेजाब व सोडा पाउडर की क्वालिटी बेहद घटिया होती है। कपडों को देखकर इससे अंदाज लगाया जा सकता है। साबुन टिकिया ऎसी है कि ठीक से हाथ भी नहीं धोए जा सकते। इनका कहना है"धोबी घाट के कर्मचारियों को नियमानुसार सुविधाएं दी जाती है। जोखिम भत्ते के बारे में पता किया जाएगा।"-डॉ. डीआर माथुर, अधीक्षक, महात्मा गांधी अस्पताल"कर्मचारियों को जोखिम भत्ता नहीं मिलता है, इसके बारे में जानकारी ली जाएगी।"-डॉ. केके सबरवाल, अधीक्षक, एमडीएम अस्पताल"अस्पतालों के संक्रमित क्षेत्र में कार्यरत चुतर्थ श्रेणी कर्मचारियों को जोखिम भत्ता मिलना तो दूर उनका स्वास्थ्य परीक्षण तक नहीं होता। सरकार को समय-समय पर ज्ञापन देकर अवगत भी कराया गया, लेकिन ध्यान किसी ने नहीं दिया।"-नगाराम चौहान, जिलाध्यक्ष, राजस्थान सहायक कर्मचारी संघ (एकी

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