देश की तिहाई आबादी जीती है12 रु. प्रतिदिन पर
करोड़ों भारतीयों का खर्च मात्र 20 रुपए रोज
29 अगस्त 2007सीएनएन-आईबीएनरुपश्री नंदा नई दिल्ली। असंगठित क्षेत्र में कार्य और आजीविका की स्थिति पर अर्जुन सेनगुप्ता की रिपोर्ट के आधार पर इस बात का खुलासा हुआ है कि 83 करोड़ 60 लाख भारतीय प्रतिदिन केवल 20 रुपए पर अपना गुजारा करते हैं। यह रिपोर्ट 1993-94 और 2004-05 के बीच लिए गए सरकारी आंकड़ों पर आधारित है। यह संख्या भले ही धीमी गति से 10 करोड़ के पार पहुंची है, वहीं दूसरी ओर अमीरों की भी संख्या बढ़कर 9 करोड़ 30 लाख हो गई। असंगठित क्षेत्र के उद्यमों पर गठित राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष अर्जुन सेनगुप्ता का दावा है कि यह सर्वेक्षण वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है। गरीबी को आंकने वाले अन्य अनुमान केवल गरीबों को मद्देनजर रखते हुए बनाए जाते हैं, लेकिन हम गरीबों की अलग-अलग श्रेणियों को ध्यान में रखते हैं। तब देश की अर्थव्यवस्था में तेजी से आखिर किसे लाभ हुआ है? मध्यम वर्गीय और अमीरों की संख्या जहां 16 करोड़ 20 लाख से बढ़कर 25 करोड़ 30 लाख हो गई है वहीं उच्च मध्यमवर्गीय लोगों की संख्या बढ़कर 9 करोड़ 10 लाख हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार अत्यंत गरीब लोगों की संख्या 27 करोड़ 40 लाख से घटकर 23 करोड़ 70 लाख हो गई है। उनका प्रति व्यक्ति उपभोग भी 9 से बढ़कर 12 रुपए हो गया है। सेनगुप्ता का कहना है कि अमीर अक्सर अपना उपभोग छुपाते हैं। इसलिए अगर आप देखें तो ये अमीर रिपोर्ट में बताई गई जानकारी से काफी ज्यादा अमीर हैं। इससे यह साबित होता है कि गरीबों और अमीरों के बीच का फासला और गहरा हो गया है। प्रतिदिन 9 रुपए से कम कमाने वाले लोगों को अत्यंत गरीब माना जाता है। लेकिन 13 रुपए प्रतिदिन कमाने वाले को गरीबी रेखा से ऊपर रखा जाता है, इसलिए गरीबी की परिभाषा को समझना कभी-कभी मुश्किल हो जाता है। माना जा रहा था कि आर्थिक सुधारों से परिस्थियां बदलेंगी, लेकिन ये उपाय नाकाफी साबित हुए हैं, क्योंकि विषम स्थिति में जीने वाले लोगों के जीवन में कोई बदलाव नहीं आया है। शायद यही कारण है कि आर्थिक सुधार के पक्षधर नेताओं को जनता के वोट नहीं मिल पाते।







